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यूपी के इन चार शहरों मे शुरू होगी मेट्रो सेवा, जल्द निर्माण कार्य होगा शुरू

यूपी के चार और शहरों में मेट्रो चलाने के लिए प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। मेरठ, बरेली, झांसी व प्रयागराज में मेट्रो चलाने के लिए प्री फिजिविलिटी रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इन शहरों में लाइट अथवा नियो मेट्रो चलाई जाएगी। शासन ने इसके लिए उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कारपोरेशन को निर्देशित किया है। वहीं बनारस में मेट्रो की जगह रोप-वे की तैयारी है। यहां पर रोपवे का नए सिरे से टेंडर होगा। इसके अलावा गोरखपुर में लाइट मेट्रो परियोजना की मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।

एनसीआर के साथ लखनऊ, कानपुर, आगरा के बाद अब प्रदेश के चार और बड़े शहरों में मेट्रो के निर्माण की कवायद तेज हो गई है। बरेली, झांसी, प्रयागराज के लिए पूर्व में स्थानीय स्तर पर खुद ही डीपीआर तैयार कराया गया था, लेकिन अब यह उपयोगी नहीं है।

क्योंकि इन शहरों में मेट्रो की जगह लाइट अथवा नियो मेट्रो की संभावना तलाशी जा रही है। इसलिए शासन ने यहां नए सिरे से फिजिविलिटी रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। इसी के साथ-साथ डीपीआर भी तैयार कराई जाएगी। इसमें मेरठ को भी शामिल किया गया है।

इन शहरों कानपुर, लखनऊ, और आगरा से कम यात्री मिलने की उम्मीद है, इसी वजह से इन शहरों में छोटी मेट्रो चलाई जाएगी। हाल ही में प्रमुख सचिव आवास नितिन रमेश गोकर्ण की अध्यक्षता में शासन में बैठक हुई। जिसमें इन चार शहरों में नए सिरे से रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कारपोरेशन को इसकी जिम्मेदारी दी गई है।

मेरठ, बरेली, झांसी तथा प्रयागराज इन चारों शहरों में जहां लाइट मेट्रो मुफीद होगी वहां उसकी मंजूरी दी जाएगी और जहां नियो मेट्रो की जरूरत होगी वहां उसे चलाने का डीपीआर तैयार किया जाएगा। इसी के साथ शासन ने कंप्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान भी बनाने को कहा है। यूपी मेट्रो के एक अफसर ने बताया कि अब जल्दी ही इन चारों शहरों का भी काम तेज हो जाएगा। यहां की फाइनल डीपीआर जल्दी ही तैयार कराई जाएगी।

वाराणसी में रोपवे का नए सिरे से होगा टेंडर

वाराणसी में रोपवे चलाने की तैयारी है। इसका डीपीआर तैयार हो गया है। शासन से मंजूरी भी हो गई है। रोपवे के लिए यहां टेंडर भी करा दिया गया था। लेकिन इसके लिए केवल दो कंपनियां ही आगे आई थी। जिसमें से एक कंपनी इसके टेंडर के लिए अर्ह ही नहीं थी। ऐसे में केवल एक अकेला टेंडर ही रह गया था। इसको देखते हुए टेंडर निरस्त कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि 30 सितंबर तक दूसरा टेंडर कराया जाएगा।

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