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यूपी के कई शहरों के लिए लखनऊ से चलेंगी अतिरिक्त बसें, देखिये रूट

लखनऊ के मानकनगर रेलवे स्टेशन पर इंटरलॉकिंग कार्य के चलते दो सितंबर तक छोटी और लंबी दूरी की 30 ट्रेनें रद्द रहेंगी। ऐसे में छोटी दूरी के यात्रियों की सुविधा के लिए रोडवेज अतिरिक्त बसें चलाएगा। ये बसें आलमबाग बस टर्मिलन से चलाई जाएगी। यात्रियों को यहां से आगरा, दिल्ली, झांसी, मथुरा व मेरठ और गोरखपुर के अलावा जिन रूटों के ज्यादा यात्री होंगे उन्हें अतिरिक्त बसों से भेजा जाएगा। इन बसों में यात्रियों ऑनलाइन के अलावा टिकट काउंटर से तत्काल में सीटों की बुकिंग करा सकते है।

परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक पल्लव बोस ने बताया कि रेलवे की ओर रद्द की ट्रेनों की सूचना आने के बाद यात्रियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त बसें चलाने का निर्णय लिया गया है। यात्रियों की मांग पर छोटी दूरी के लिए अतिरिक्त बसों का संचालन आलमबाग बस टर्मिनल से होगा। वहीं बरेली, सहारनपुर, शाहजहांपुर के लिए बसें कैसरबाग बस अड्डे पर मिलेंगी। अतिरिक्त बसों के संचालन को रविवार को डिपो के सभी अफसरों को दिशा-निर्देश भेज दिया गया है।

राजधानी लखनऊ में एलडीए कॉलोनी कानपुर रोड तथा आलमबाग आजाद नगर को जोड़ने वाला पकरी का पुल चौड़ा होगा। इसके लिए कवायद शुरू हो गई है। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियन्ता मनीष वर्मा ने 18 अगस्त को स्मारक समिति को पत्र लिखकर पुल चौड़ा करने के लिए एनओसी मांगी है। लोक निर्माण विभाग ने इसे चौड़ा करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके चौड़ा होने से एलडीए कॉलोनी कानपुर रोड, आशियाना और आलमबाग क्षेत्र के करीब डेढ़ लाख लोगों को फायदा होगा। यहां लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी।

एलडीए कॉलोनी कानपुर रोड के बौद्ध विहार के पास से पकरी का पुल बना है। जो आजाद नगर आलमबाग की तरफ जाता है। पुल पहले काफी चौड़ा था। लेकिन वर्ष 2008 में तत्कालीन मायावती सरकार में इसे तोड़ बौध विहार में मिला दिया गया था। इससे एलडीए कॉलोनी की तरफ जाने वाला रास्ता बंद हो गया था। इसकी वजह से लोगों को आने जाने में भारी दिक्कतें हो रही थी। एलडीए कॉलोनी आने के लिए आलमबाग, आजाद नगर, गीतापल्ली, पवनपुरी, ओम नगर, भिलावा, चंदननगर, सुजानपुरा, छोटा बरहा, बड़ा बरहा, आनंद नगर सहित करीब तीन दर्जन मोहल्लों के लोगों को या तो अवध अस्पताल चौराहे से आना पड़ता था या फिर बांग्ला बाजार होकर।

वर्ष 2014 में फिर बना पुल लेकिन कर दिया संकरा

2014 में तत्कालीन अखिलेश यादव की सरकार में पकरी के पुल को दोबारा खोला गया लेकिन बौद्ध विहार शांति उपवन का बहुत थोड़ा हिस्सा ही तोड़ा गया। जिससे रास्ते की चौड़ाई बेहद कम हो गयी। नतीजा यह रहा कि यहां से एक साथ दो बड़ी गाड़ियां नहीं निकल पाती हैं। इससे जाम लगता है। अक्सर गाड़ियां आपस में रगड़ जाती हैं।

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